दिल्ली देहात का दिल जीतने मैदान में उतरे गुग्गन, हंस और लिलोठिया

रिपोर्ट : अजीत कुमार 


 



 


देशभर में लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोर शोर से देखने को मिल रही है। हर कोई प्रत्याशी अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। इसी फेहरिस्त में बात करें अगर राजधानी दिल्ली की, तो दिल्ली में 7 लोकसभा सीट है, और सातों की सातों सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। इन सभी सातों सीटों में से दिल्ली की उत्तर परिूचमी सीट का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है।
राजधानी दिल्ली की उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से तीन मुख्य पाटियों के जो चेहरे हैं, उसमें बीजेपी से स्टार चेहरे हंसराज हंस को उतारा है, कांग्रेस ने राजेश लिलोठिया को तो आप ने गुग्गन सिंह रंगा को। इस चुनाव में जहां कांग्रेस ओर बीजेपी के प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनावी मुकाबले की बात कर रहे हैं, तो वहीं आम आदमी पार्टी दिल्ली को पूर्ण राज्य की मांग पर चुनाव लड रहे हैं।
अब अगर बात करें तो प्रत्याशियों की लोकप्रियता की तो बीजेपी के प्रत्याशी हंसराज हंस एक सूफी गायक है, जो अब अीजेपी की तरफ से इस चुनावी मैदान पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हंस राज हंस बड़े कलाकार हैं, अच्छा गाना गाते हैं, लेकिन अब क्षेत्र की जनता के बीच वोट के लिए जा रहे हैं। कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी राजेश लिलोठिया दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष है। उनका कांग्रेस में अपना ही एक अलग कद है। जबकि आम आदमी पार्टी से प्रत्याशी गूगन सिंह भले ही स्थानीय है, लेकिन वह एक बार भाजपा की तरफ से विधायक का चुनाव जनता के लिए आवाज बन चुके है। जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार होने का भी उनको फायदा मिल सकता है।
दूसरी ओर उत्तर पश्चिमी लोकसभा सीट पर 2014 के चुनाव में भाजपा को जीत मिली और उदित राज यहां से सांसद चुने गए। लेकिन बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद उदित राज को ही टिकट से वंचित कर दिया और भरोसा जताया मशहूर गायक हंसराज हंस पर जताया। हंसराज हंस भले ही अभी चुनाव के दौरान दिल्ली के रोहिणी में रहने की बात कर रहे है, लेकिन यह भी सच्चाई है, कि इससे पहले उनका इस क्षेत्र से कोई सरोकार नहीं था। बात अगर की जाए कांग्रेस प्रत्याशी राजेश लिलोठिया की तो इससे पहले उत्तर पश्चिमी सीट से राजकुमार चैहान को टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही थी, जो एक चर्चित चेहरा रहे हैं। उनका अपना एक भारी जनसर्मथन था। गौरतलब है कि लिलोठिया को टिकट मिलने से पहले उत्तर पश्चिमी दिल्ली से टिकट के दावेदार रहे राजकुमार चैहान के समर्थकों ने राहुल गांधी के आवास के बाहर उनके समर्थन में प्रदर्शन किया था। लेकिन अब राजेश लिलोठिया इस सीट से चुनावी मैदान पर है। आज तीनों मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी अपने अपने तरीके से जनता के बीच पहुॅचकर अपने लिए क्षेत्र की जनता से वोट मांग रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तर पश्चिमी लोकसभा क्षेत्र दिल्ली का एकमात्र आरक्षित सीट है। यहां से पिछली बार 2014 के में बीजेपी के टिकट पर उदित राज ने जीत दर्ज की थी। उन्हें लगभग साढे 46 प्रतिशत मत मिले थे, वहीं करीब साढ़े 38 प्रतिशत मतों के साथ आम आदमी पार्टी की राखी बिड़लान दूसरे स्थान पर थीं।
2009 में यहां से करीब 57 प्रतिशत मतों से जीतकर सांसद बनीं कांग्रेस नेता कृष्णा तीरथ को 2014 में 13 पगतिशत वोट भी नहीं मिल सके थे। लेकिन इस बार ना तो 2014 जैसी सियासी परिस्थितियां हैं और न ही 2014 वाला एक भी चेहरा मैदान में हैं। कुल मिलाकर इन नेताओं के अपने दावे हैं और अपनी दलीलें हैं।
बीजेपी के प्रत्याशी का चेहरा तो बड़ा है लेकिन उनकी चुनौती ये है कि वो अभी संगठन और क्षेत्र को समझने की ही कोशिश कर रहे हैं। देखना ये है कि उत्तर पश्चिमी दिल्ली में बीजेपी का स्टारडम कमल खिलाता है या अपने गांव के नाम को सरनेम के रूप में लगाने वाले राजेश लिलोठिया दिल्ली देहात का दिल जीत पाते हैं या फिर गुग्गन सिंह रंगा का अनुभव और स्थानीय चेहरा आम आदमी पार्टी के सिर पर जीत का सेहरा सजा पाता है। खैर यह तो दिल्ली में होने 12 मई के चुनाव के बाद 23 मई को घोषित परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन इस सीट से कोई भी प्रत्याशी जीत कर आए अन्ततः जीत तो जनता की ही होगी, क्योंकि लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता ही महान होती है।