डॉ. जितेन्द्र सिंह 23 नवंबर को “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट समारोह” का उद्घाटन करेंगे

 


 



 


केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ.जितेन्द्र सिंह 23 नवंबर को वाराणसी में “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह का आयोजन पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास सचिव डॉ. इंदरजीत सिंह और पूर्वोत्तर परिषद के सचिव श्री के मॉस चेलाई भी शामिल होंगे।


पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने आज समारोह का थीम सांग जारी किया। चार दिवसीय समारोह का आयोजन 23 से 26 नवंबर तक आईआईटी,बीएचयू के परिसर में किया जाएगा।“डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” का आयोजन इससे पूर्व दिल्ली और चंडीगढ़ में किया जा चुका है। “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” समारोह दर्शकों को पूर्वोत्तर राज्यों की सांस्कृतिक विरासत का सीधा अनुभव कराएगा। समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठ राज्य अपने-अपने राज्यो के हस्तशिल्प,हथकरघा, जैविक उत्पादों और सांस्कृतिक दलो के साथ भागीदारी करेंगे।


इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य शेष भारत को पूर्वोत्तर के समीप लाना और उन्हें पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति का अनुभव कराना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद से ही पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र का तीस से अधिक बार दौरा किया।


डॉ.जितेन्द्र सिंह ने कहा कि देश के  सीमावर्ती राज्यों का विकास भारत के समसरतापूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में संपर्क बढ़ाने के कई पहल की गई हैं। आज युवा उद्यमी नए अवसरों के लिए पूर्वोत्तर का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर स्टॉर्ट-अप के लिए वेंचर निधि और असम में स्थापित किए जा रहे बांस पार्क का जिक्र भी किया। जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वाराणसी में “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” समारोह में एक बांस पैवेलियन की स्थापना की जाएगी। समारोह के दौरान एक दिन व्यापारिक समुदाय को पूर्वोत्तर राज्यो में अवसरों का पता लगाने के लिए व्यापार सत्र का आयोजन भी किया जाएगा।


समारोह के दौरान दर्शकों को पूर्वोत्तर राज्यो के कारीगरों और कलाकारों द्वारा उनके हथकरघे और हस्तशिल्प का सीधा अनुभव देखने का अवसर प्राप्त होगा। इस दौरान दिन में कलाकार खुले मंच पर नृत्य-संगीत का प्रदर्शन भी करेंगे।   कार्यक्रम में देशी खेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जहां दर्शक भी भागीदारी कर सकते हैं। समारोह में पूर्वोत्तर और उत्तर प्रदेश के व्यंजनों का आनंद दर्शक अपने सामने सीधे बनते हुए ले सकेंगे।


गंगा और बह्मपुत्र  नदी घाटी में प्राचीन संस्कृति,विविध हथकरघा और सूती उत्पादों,आध्यात्मिक विरासत और जीवंत पर्यटन केंद्रों के मामले में कई समानताएं नजर आती हैं। इसलिए “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” के आयोजन के लिए वाराणसी  का चयन स्वभाविक था। समारोह में केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसी एनईआरसीओआरएमपी, सीबीटीसी,एनईआरएएमएसी, एनईएचएचडसी, ललित कला अकॉदमी और अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध केंद्र भी भागीदारी करेंगे।


संगीत पूर्वोत्तर क्षेत्र की आत्मा है। डेस्टीनेशन नार्थ-ईस्ट समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र के बड़े कलाकारों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।शिलांग चैंबर चॉयर, पपो,सुरभिदेवबर्मा,बॉरकुंगरंगहॉल,रेखा भारद्वाज प्रमुख कलाकारो में शामिल हैं, जिनके समारोह के दौरान प्रस्तुति दे सकते हैं। जैविक उत्पादों के संदर्भ में पूर्वोत्तर राज्यों के महत्व को ध्यान में रखते हुए जैविक उत्पादों,खाद्य प्रसंस्करण,पर्यटन,जल विकास जैसे विषयों पर हर समुह  संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिसमें विषय़ से जुड़े विशेषज्ञ भी भागीदारी करेंगे।


पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटकों के लिए इको-पर्यटन,संस्कृति,विरासत और व्यापार के के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। क्षेत्र में परंपरागत पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन जैसे ईको-पर्यटन के लिए वन्यजीव अभ्यारण्य,मनमोहक दृश्य,झरने और  जंगलो की मौजूदगी इसे पर्यटकों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती है। क्षेत्र साहसिक गतिविधियो के लिए रीवर राफ्टिंग,विभिन्न स्तर की ट्रैकिंग, रॉक क्लाईबिंग,हैंग ग्लाइडिंग सहित विभिन्न अवसर प्रदान करता है। संस्कृति एक अहम पहलू है और चुने हुए सांस्कृतिक पर्यटको को पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर आकर्षित करने की क्षमता रखती है।समृद्ध जनजातीय विरासत और संस्कृति क्षेत्र को शेष भारत से एक अलग पहचान दिलाती है।


आठ पूर्वोत्तर राज्यों में कला और शिल्प क्षेत्र में विविधता क्षेत्र की एक ओर प्रमुख पहचान है। पूर्वोत्तर राज्यो में हस्तशिल्प हर किसी की दिनचर्या का एक हिस्सा है। स्थानीय समुदाय द्वारा पर्यटन संबंधी सामुदायिक सांस्कृतिक गतिविधियो में सक्रिय भागीदारी का बढ़ना एक अहम पहलु है। क्षेत्र में विरासत पर्यटन का तेजी से विकास हुआ है,जिसके कारण पर्यटक केवल स्मारकों को देखने से ज्यादा सक्रिय रूप से भागीदारी भी कर रहे हैं। क्षेत्र में अनेक प्रसिद्ध और पुरातन धार्मिक स्थल भी हैं जिन्हें श्रद्धालुओं के लाभ के लिए राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट से जोडा गया है।


आकर्षक प्राकृतिक वातावरण और व्यापारिक बैठकों के लिए बाहरी स्थानों के बढ़ते चलन के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र व्यापारिक पर्यटन के लिए भी अपार संभावनाओं से भरा है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क,उच्च स्तर के होटल, सम्मेलन केंद्रो, रिसोर्ट आधारित सम्मेलन केंद्रो आदि ने इस क्षेत्र के विस्तार में योगदान किया है।