नागरिकता विधेयक मूलत: असंवैधानिक : शशि थरूर

 


 



 


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशी थरूर ने बुधवार को नागरिकता विधेयक, 2019 का विरोध किया और इसे मूल रूप से असंवैधानिक बताया। साथ ही कहा कि यह भारत के मूल विचार का उल्लंघन करता है। थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इससे कुछ घंटे पहले उस विधेयक के मसौदे को अपनी मंजूरी दे दी, जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से यहां आए हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनियों और बौद्धों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है।


थरूर ने संसद परिसर में मीडिया से कहा, "मुझे लगता है यह विधेयक मौलिक रूप से असंवैधानिक है, क्योंकि इसमें भारत के मूल विचार की अवहेलना होती है। जो यह मानते हैं कि धर्म को राष्ट्रीयता का निर्धारण करना चाहिए..वह पाकिस्तान का विचार था। उन्होंने पाकिस्तान बना लिया। हमने हमेशा बहस किया है कि हमारे देश का विचार वह है, जिसके बारे में महात्मा गांधी, नेहरूजी, मौलाना आजाद, डॉ. अंबेडकर ने कहा है..कि धर्म राष्ट्रीयता का निर्धारण नहीं कर सकता।"


तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी का एक देश के लिए दृष्टिकोण यह है कि देश धर्म से परे जाकर सबका है। उन्होंने कहा, "इस देश में सभी धर्म वाले नागरिकों को समान अधिकार है और वह इन्हें मिलना चाहिए।" कांग्रेस नेता ने कहा कि नागरिकता अधिनियम, 1955 को संशोधित कर बनाया गया यह विधेयक चुनिंदा वर्गो के प्रवासियों को नागरिकता के लिए वैध बनाता है। यह संविधान के मूल तत्व को 'नजरअंदाज' करता है।


इस विधेयक का विपक्षी दलों, अल्पसंख्यक संगठनों व अन्य ने मुस्लिमों को शामिल नहीं करने और संविधान की भावना की उपेक्षा किए जाने के आधार पर विरोध किया है। इस विधेयक को संसद में अगले हफ्ते पेश किए जाने की संभावना है।