रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को एक गंभीर चुनौती बताया

रिपोर्ट : अजीत कुमार


 



 


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आतंक और इससे जुड़ी हिंसा ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा माहौल के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की है और सरकार समर्थित और गैर-सरकारी आतंकवाद के जरिये परोक्ष रूप से हिंसा फैलाने वालों ने खतरे को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में आतंकवादियों के बुनियादी ढांचों की लगातार उपस्थिति और सरकार समर्थित आतंकवाद ने भारत के धैर्य की परीक्षा ली है। हालांकि, एक जिम्मेदार और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में, भारत ने दिखा दिया है कि वह आतंकवादी समूहों और उन्‍हें संरक्षण देने वालों के इरादों को नाकाम करने और उन्‍हें रोकने में सक्षम है। दिल्‍ली में तीसरे रक्षा अताशे सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आश्वासन दिया कि भारत ऐसा करना जारी रखेगा।


हिंद महासागर और भारत-प्रशांत क्षेत्र में खतरों की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “हमें अपने हितों को सुरक्षित रखने पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। हमने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय उपाय अपनाने के साथ-साथ हिन्‍द महासागर रिम देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया ताकि एक स्थिर समुद्री माहौल बनाया जा सके।”


डेफएक्सपो 2020 और इसके द्वारा प्रदान किए गए अवसरों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश राज्यों में दो औद्योगिक गलियारों की स्थापना के साथ, उम्मीद है कि इससे रक्षा विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि होगी। इन गलियारों में डीए के काम करने और एफडीआई को आकर्षित करने की बहुत गुंजाइश है। भारत ने मैत्रीपूर्ण देशों को भारतीय रक्षा निर्यात की अनुमति देने और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए अनेक रक्षा लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) की भी पेशकश की है।


डेफएक्सपो 2020 और इसके द्वारा प्रदान किए गए अवसरों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश राज्यों में दो औद्योगिक गलियारों की स्थापना के साथ, उम्मीद है कि इससे रक्षा विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि होगी। इन गलियारों में डीए के काम करने और एफडीआई को आकर्षित करने की बहुत गुंजाइश है। भारत ने मैत्रीपूर्ण देशों को भारतीय रक्षा निर्यात की अनुमति देने और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए अनेक रक्षा लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) की भी पेशकश की है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत जैसा बड़ा देश अपने रक्षा सहयोग को कुछ देशों तक सीमित नहीं कर सकता। इसे लगातार विस्तारित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इस दिशा में राजनाथ सिंह ने 10 नए रक्षा विंग बनाने की घोषणा की ताकि 10 और रक्षा अताशे (डीए) नियुक्त किए जा सकें। उन्होंने कहा कि इससे भारत की रक्षा कूटनीति को और मजबूती मिलेगी।


सरकार ने सम्‍बद्ध देशों को डीए के माध्यम से रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, 34 देशों को निर्यात प्रोत्साहन के लिए धन आवंटित किया गया है। राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई कि रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डीए इस फंड का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करेंगे।


रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (डीपीएसयू) ने विभिन्न देशों जैसे वियतनाम, सिंगापुर, म्यांमार, ओमान आदि में अपने संपर्क अधिकारियों के लिए कार्यालय खोले हैं। निर्यात के लिए भारतीय कंपनियों के प्रयासों को सरल बनाने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत एक निर्यात प्रोत्साहन और निवेशक सेल की स्थापना की गई है। सामान्‍य खुले निर्यात लाइसेंस (ओजीईएल) की अधिसूचना भी इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम है।  


राजनाथ सिंह ने डीए द्वारा लखनऊ में आयोजित होने वाले डिफेंस एक्सपो 2020 में विभिन्न रक्षा आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों और उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की, जो अब तक का सबसे बड़ा डेफएक्सपो है।


रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार ने भी डीए को संबोधित किया। नौसेना अध्‍यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, थल सेनाध्यक्ष जनरल एम. एम. नरवाना और विभिन्न देशों के डीए सम्मेलन में शामिल हुए।