विश्व बैंक कारोबारी सुगमता श्रेणी में भारत ने 79 पायदानों की छलांग लगाई

 


 



 


केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा, 2019-20 पेश की। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता श्रेणी में 79 स्थानों की छलांग लगाई है। भारत 2014 के 142 वें स्थान से 2019 में 63 वें स्थान पर पहुंच गया है।


देश ने 10 मानकों में से 7 मानकों में प्रगति दर्ज की है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) कानून उन सुधारों की सूची में सबसे उपर हैं जिनके कारण श्रेणी में भारत की स्थिति बेहतर हुई है। हालांकि भारत कुछ अन्य मानकों यथा कारोबार शुरू करने में सुगमता (श्रेणी 136), सम्पत्ति का पंजीयन (श्रेणी 154), कर भुगतान (श्रेणी 115), संविदाओं को लागू करना (श्रेणी 163) आदि में अभी भी पीछे है।


पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत में कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है। आज भारत में कारोबार शुरू करने के लिए औसतन 18 दिनों का समय लगता है जबकि 2009 में औसतन 30 दिनों का समय लगता था। हालांकि भारत ने कारोबार शुरू करने में लगने वाले समय और लागत में महत्वपूर्ण कमी की है लेकिन इसमें और सुधार की आवश्यकता है।


सेवा क्षेत्र को भी अपने दैनिक कारोबार के लिए विभिन्न नियामक अवरोधों का सामना करना पड़ता है। पूरी दुनिया में रोजगार और विकास के लिए बार एवं रेस्तरां को महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। यह एक ऐसा व्यापार है जिसमें कारोबार शुरू करने और बंद होने की आवृत्ति बहुत अधिक होती है। एक सर्वेक्षण दिखलाता है कि भारत में एक रेस्तरां खोलने के लिए आवश्यक लाइसेंसों की संख्या अन्य देशों की तुलना में अधिक है।


पिछले 5 वर्षों के दौरान भारत ने निर्माण अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। 2014 में निर्माण अनुमति प्राप्त करने में लगभग 186 दिनों का समय लगता था और भण्डारण लागत का 28.2 प्रतिशत व्यय होता था। 2014 की तुलना में 2019 में 98-113.5 दिनों का समय लगता है और भण्डारण लागत का 2.8-5.4 प्रतिशत खर्च होता है।


जबकि सरकार ने प्रक्रियात्मक तथा कागजात संबंधी जरूरतों में पहले ही काफी कटौती की है, डिजिटलीकरण बढ़ाने तथा बहुविध एजेंसियों को एक डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने से इन प्रक्रियात्मक खामियों में और भी अधिक कमी हो सकती है तथा उपभोक्ताओं के अनुभव में काफी बेहतरी हो सकती है।


भारत में समुद्री जहाजों की आवाजाही में लगने वाले समय में निरंतर कमी हो रही है, जो 2010-11 के 4.67 दिनों से लगभग आधा होकर 2018-19 में 2.48 दिन हो गया है। यह दर्शाता है कि समुद्री पोतों के मामले में महत्वपूर्ण लक्ष्यों तक पहुंचना संभव है। हालांकि, पर्यटन अथवा विनिर्माण जैसे खास क्षेत्रों की कारोबारी सुगमता को सरल बनाने में, और अधिक लक्षित पहुंच की जरूरत है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र की नियामक तथा प्रक्रियात्मक बाधाएं दूर हों। एक बार जब प्रक्रिया तय की गई है, सरकार के समुचित स्तर – केंद्र, राज्य अथवा निगम द्वारा इसमें  सुधार किया जा सकता है।


भारत में सेवाओं अथवा विनिर्माण कारोबार स्थापित करने तथा संचालित करने में कानूनी, नियम तथा विनियमन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें से कई स्थानीय जरूरतें हैं, जैसे एक रेस्टोरेंट खोलने में पुलिस की स्वीकृति के लिए कागजात का बोझ। इसे ठीक किया जाना चाहिए तथा एक समय में एक क्षेत्र को सुसंगत बनाया जाना चाहिए। भारत में एक अनुबंध को लागू करने में औसतन 1445 दिनों का समय लगता है, जबकि न्यूजीलैंड में 216 दिन, चीन में 496 दिन लगते हैं। भारत में करों के भुगतान में 250 घंटे से अधिक समय लगता है, जबकि न्यूजीलैंड में 140 घंटे, चीन में 138 घंटे और इंडोनेशिया में 191 घंटे लगते हैं। इन मापदंडों में सुधार लाने की संभावना है।


बैंगलुरू हवाई अड्डे से इलेक्ट्रानिक्स सामग्रियों के निर्यात एवं आयात के मामलों के अध्ययन से पता चलता है कि किस प्रकार भारतीय उपस्कर प्रक्रियाओं को विश्व स्तरीय बनाया जा सकता है। वस्तु निर्यात संबंधी मामलों के अध्ययन से पता चला है कि भारतीय समुद्री पोतों में उपस्करों की काफी कमी है। निर्यात की तुलना में आयात की प्रक्रिया अधिक कारगर है। हालांकि, खास मामले से जुड़े अध्ययनों को सामान्य रूप में लेने के प्रति सावधानी बरतने की जरूरत है, यह स्पष्ट है कि समुद्री पोतों में सीमा शुल्क निपटारे, एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने तथा लदान में कई दिनों का समय लगता है, जिसे कुछ घंटों में पूरा किया जा सकता है।